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भारतीय ज्ञान परंपरा, योग और शोध को बढ़ावा देने पर बनी साझा सहमति

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भारतीय ज्ञान परंपरा, योग और शोध को बढ़ावा देने पर बनी साझा सहमति

 

 

अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलाधिपति व आध्यात्मिक गुरू डॉ० चिन्मय पंडया जी ने श्री दरबार साहिब पहुंचकर श्री महाराज जी से शिष्टाचार भेंट की।

देश के सबसे विशाल व प्रतिष्ठित आध्यात्मिक संगठन के अध्यक्ष व आध्यात्मिक गुरू, देव संस्कृति विश्वविद्यालय के माननीय कुलाधिपति डॉ० चिन्मय पंड्या जी ने सपरिवार श्री दरबार साहिब, पहुँचकर श्री महाराज जी से शिष्टाचार भेंट की व श्री झण्डा साहिब व श्री दरबार साहिब में मत्था टेका, श्री दरबार साहिब में डॉ० पंड्या जी का गर्मजोशी व अत्मीयता के साथ स्वागत किया गया।

इस अवसर पर डॉ० चिन्मय पंडया जी ने भारतीय संस्कृति, आध्यात्म एवं राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में किए जा रहे सेवा कार्यों पर अपने विचार साझा किए। श्री महाराज जी ने कहा कि, शांतिकुंज, हरिद्वार, भारत ही नहीं अपितु विश्व का एक बड़ा सामाजिक व आध्यात्मिक संगठन है। अखिल विश्व गायत्री परिवार से करोड़ों लोग जुड़े है। शांतिकुंज कई दशकों से सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार व सभ्यता को अक्षुण्ण रखने के लिए बड़े सेवाभाव से कार्य कर रहा है। देशवासियों सहित विश्व के नागरिकों को संस्कारवान बनाना व प्राणीमात्र के कल्याण के लिए जीवन जीना और युवा पीढ़ी के साथ-साथ सभी नागरिकों में अच्छे नैतिक संस्कारों का रोपण करना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। शांतिकुंज, हरिद्वार, सेवा, समर्पण व देशभक्ति के कारण पूरे विश्व में प्रसिद्ध है।

श्री महाराज जी ने शांतिकुंज व अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा समाज सेवा, संस्कार एवं राष्ट्रोत्थान के लिए किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि, संगठन निःस्वार्थ भाव से समाज सेवा एवं राष्ट्र हित में सतत योगदान दे रहा है। उन्होंने डॉ० चिन्मय पंडया जी के सरल व्यक्तित्व, सेवा-भावना एवं समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

डॉ० चिन्मय पंडया जी ने भी श्री गुरु राम राय एजुकेशन मिशन, श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय व श्री महन्त इन्दिरेश अस्पताल द्वारा समाजहित में किए जा रहे कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

वार्तालाप के दौरान श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के मध्य शिक्षा, शोध, भारतीय ज्ञान परम्परा, योग, संस्कृति व अन्य शैक्षणिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में आपसी सहयोग से कार्य करने पर विचार किया गया।

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By admin

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