श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में मनाया गया विश्व सिज़ोफ्रेेनिया दिवस

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श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में

मनाया गया विश्व सिज़ोफ्रेेनिया दिवस 

देहरादून। 

श्री महंत इन्दिरेश अस्प्ताल के मनोरोग विभाग की ओर से शनिवार को विश्व सिज़ोफ्रेेनिया दिवस  मनाया गया। इस अवसर पर मेडिकल छात्र-छात्राओं ने पोस्टर बनाकर मानसिक स्वास्थ्य से जुडे़ विभिन्न विषयों को रेखांकित किया व जनजागरूकता की अलख जगाई। सेलीब्रेटिंग दि पाॅवर आॅफ कम्यूनिटी काइंडनेस थीम पर आयोजित प्रतियोगिता में 35 मेडिकल छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया। उत्कृष्ट पोस्टर बनाने वाले नर्सिंग की छात्रा प्रिया, झिलमिल एवम् आकांक्षा को एसजीआरआर इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल एण्ड हैल्थ साइंसेज के प्राचार्य डाॅ आर.के वर्मा ने पुरस्कृत किया। 

शनिवार को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में विश्व सिज़ोफ्रेेनिया दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एण्ड हैल्थ साइंसेज के प्राचार्य डाॅ आर. के. वर्मा व मनोरोग विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ शोभिग गर्ग ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर छात्र-छात्राआंे ने अलग अलग कार्यक्रम प्रस्तुत गए। 

काबिलेगौर है कि दुनियाभर में सिज़ोफ्रेेनिया बीमारी के मरीज़ बढ़ रहे हैं। इस बीमारी के प्रभाव की वजह से मरीज़ अपने आप में बडबड़ाना, सोचने समझने व व्यवहार के तरीके में बदलाव आ जाता है। मरीज़ में शक करने की प्रवृति बढ़ जाती है व अपने आप में बड़बडाता रहता है व तरह तरह के भ्रम करने लगता है। विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि सिज़ोफ्रेेनिया का उपचार सम्भव है। मरीज़ के परिवारजनों का दायित्व है कि वे कुशल मनोचिकित्सक से राय लेकर मरीज़ का उपचार करवा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान मानसिक रोगियों को भी इस मुहिम में जोड़ा गया। मनोरोग विशेषज्ञों ने विभिन्न माॅडल्स व जानकारियों क माध्यम से मानसिक रोगों व उनके उपचार के प्रति जागरूक किया। 

प्राचार्य डाॅ आर.के वर्मा ने छात्र-छात्राआंे का प्रोत्साहन किया व मानसिक रोगों के आधुनिक उपचार के बारे में महत्वपूर्णं जानकारियां सांझा की। डाॅ शोभित गर्ग ने कहा कि देश दुनिया में मानसिक रोगों के बढ़ते मामले चिंताजनक हैं। मानसिक मरीजों व उनके परिवार के सदस्यों को मानसिक बीमारी के लक्षण और उसकी रोकथाम के उपयों के बारे में सजग रहना चाहिए। उन्होनंे मानसिक रोगों से बचाव व रोकथाम के महत्वपूर्णं टिप्स दिए। उन्होने कहा कि आम दिनचर्या में थोड़ा परिवर्तन लाकर मानसिक रोगों के चक्र को तोड़ा जा सकता है। 

इस अवसर पर आयोजित पोस्ट प्रतियोगिता में डाॅ रोबिना मक्कड़, डाॅ डोरछम ख्राइम, डाॅ निधि जैन श्रीमती रेचल प्रसाद ने जज की भूमिका निभाई।

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